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नया सवेरा

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31 -Jul-2019 Divya Raj kumar Hard Work Poems 1 Comments  949 Views
Divya Raj kumar

वक्त वक्त का घाव यह
ऐसे न मुरझाएगा
उत्पन्न उस पीड़ से
मन कच्चोटता रह जाएगा
कदम कदम फूंक कर
अंगारों पर रखा जाएगा
हर पड़ाव पर खुद को
सशक्त निखारा जाएगा
बुलंदियों को छूने के लिए
आसमां कम पड़ जाएगा
जब जब हौसलों का हाथ थामे
आगे को बढ़ा जाएगा
तब नया सवेरा नया उड़ान होगा
अंधकार में प्रकाश होगा
जहां प्रयास की कसौटी पर
कोयले में हीरा तराशा जाएगा
-दिव्या राज कुमार



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1 More responses

  • poemocean logo
    ARUN (Guest)
    Commented on 30-March-2020

    I m love in this poem like it.

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