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नये रास्ते

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09 -Sep-2017 Vikram Miscellaneous Poems 0 Comments  975 Views
नये रास्ते

नए रास्ते

अपने आपको दोहराता हूँ मैं
रोज़ रोज़
चलता हूँ एक ही रास्ता
कभीकभी
घूम आता हूँ
पुराना एक रास्ता
जो चला ही होता है
किसी समय में
कायदे से
एक सिलसिले से
स्वाभाविक है
वह छूटा हुआ एक रास्ता ही होता है !

छूटे हुए रास्ते
जहन में बसे ही होते हैं
दूर पार तक फैला होता है
उनका जंगल
गुजरते हुए उनसे
बोल ही जाता है
दिल का पपीहा !

नए रास्ते
नए दायित्वों के द्योतक होते हैं
बदलाव प्रकृति का नियम
इसलिए तो होते हैं
नए रास्ते
तभी तो
बनता नया समाज नया देश
नये वक़्त का

विक्रम गथानिया



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