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निर्मल धारा की विदाई

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12 -Mar-2020 Sachin Kumar Pal Farewell Poems 0 Comments  146 Views
निर्मल धारा की विदाई

निर्मल धारा की विदाई
हृदय की गहराई से निकली,
ऐसी निर्मल धारा ।
जिनके संपर्क में आने से सारा,
नष्ट हुआ कष्ट हमारा ।।

ऐसे हिंदी के महाज्ञानी को मैं,
दिल से आभाष कराता हूँ ।
हम वर्मा जी को न भूल पायेंगे,
ऐसा विश्वास दिलाता हूँ ।।

ये उन विभूतियों में से एक है,
जिन्होंने मुझे हर समय सपोर्ट किया ।
मेरे इस कार्यालय में Joining करते ही,
एक डॉट के बाद, मेरा मार्गदर्शन किया ।।

लेकिन उस डॉट में भी उनका,
न जाने कैसा प्यार था।
कुछ समय बाद समझ में आया कि
ये तो साहब की, आवाज का दुलार था।।

ऐसे सादर गुरू के,
चरणों में शीष झुकाता हूँ।
नम आंखों एवं खुशियों से
उनकी विदाई कराना चाहता हूँ।।

(सचिन कुमार)
आशुलिपिक ग्रेड- II
कार्यालय निदेशक (विज्ञान)
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, देहरादून



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