Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

निष्ठुर सर्दी या हम

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Nishthur Sardi Ya Hum : Here is one of the best heartbreaking poem on heartless parents or woman who throw their girl child in dustbin to discard her. This poem describe the cruelty level of a human being. Even in extreme cold day of winter season where everyone was trying to keep himself / herself warm a woman threw her child in dustbin / garbage only wrapped in small rags. This poem convey a message to our society to not throw child in this way. If you have birth them then you should take care of them.

07 -Jan-2018 Akshunya Winter Season Poem 0 Comments  1,043 Views
Akshunya

शीत लहर चल रही थी,
पूरी दुनिया ठिठुर रही थी।
कोई अलाव जलाए बैठा था,
तो कोई रजाई में दुबका बैठा था।
कई हाथ मसले जा रहे थे,
तो कहीं दांत किटकिटा रहे थे।
कोई जैकेट पहने घूमता था,
तो कोई शाॅल ओढ़े बैठा था।
सबने अपनी अपनी जुगत लगाई,
कि हार जाए यह शीत ऋतु की ठंडाई।
पर कोई जुगत भी काम न आई,
कैसी थी यह सर्दी हरजाई।
दूर कूड़े के ढेर में, एक कुकर ढूंढे अपने लिए ऊष्मा का सहारा।
तभी कानों में पड़ा, एक मधुर पर करुण रुदन; जो तड़प रहा था बेसहारा।
अनायास ही मैं चल पड़ा था, उस मर्म रुदन ने मुझे आकर्षित किया था।
कोई और नहीं यह था एक मानव का जाया।
जया कहूँ या विजया, क्या था इसका नाम धराया।
कौन था वह निष्ठुर, निरलज्ज जिसने इस नवजात को फैंक पाप कमाया।
कोई लक्ष्मी कहे, कोई शारदा, कोई सरस्वती को धयता,
फिर भी ऐसा कर्म करके क्या उसका जी नहीं लजाता।
कैसा निष्ठुर समाज है, जिससे इस जीवन में आता, उसी मां, बहन, बेटी को इक दिन कूड़े के ढेर में फैंक आता,
इक दिन कूड़े के ढेर में फैंक आता।।



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