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O Gullak O Gullak

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23 -Nov-2016 Dr. Pradeep Shukla Saving Poems 0 Comments  1,708 Views
Dr. Pradeep Shukla

ओ गुल्लक, ओ गुल्लक मुझको दे पैसे
मैं इनको खर्च करूं फ़िर चाहे जैसे

मैंने मँगाई किराए की कार
परसों से गुड्डा है मेरा बीमार
जल्दी गिराओ अठन्नी दो चार
प्रश्नों की हम पर न फेंको बौछार

तरसे हैं पापा न तरसाओ ऐसे
ओ गुल्लक, ओ गुल्लक मुझको दो पैसे

नाना ने मुझको दिया था रुपैया
रोई थी मैं उसको छीने जब भैया
मुश्किल से मैंने था उसको बचाया
आईस्क्रीम को मन से मार कर भगाया

मेरा ही पैसा न दो मुझको कैसे
ओ गुल्लक, ओ गुल्लक मुझको दो पैसे

दस पैसे चार आने बिल्कुल न लूंगी
जितने मैं चाहूंगी ले कर रहूंगी
गुड़िया की शादी के सपने हैं मेरे
बिना बैंड बाजा करूंगी न फेरे

शादी करूंगी नहीं ऐसे वैसे
ओ गुल्लक, ओ गुल्लक मुझको दो पैसे
मानेगी तो तुझको रक्खूंगी घर में
नहीं एक कीला मैं ठोकूंगी सर में
ओ गुल्लक तू मुझको लगती है प्यारी
माना बचत की है मंशा तुम्हारी

करूं क्या मैं फोडूं तुझे जैसे तैसे
ओ गुल्लक, ओ गुल्लक मुझको दो पैसे

O Gullak O Gullak


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