Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

(29) सागर की लहरें

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25 -Apr-2021 Madhu Ocean Poems 0 Comments  809 Views
(29) सागर की लहरें

(29) सागर की लहरें सागर के किनारे खड़े होकर, देख रहे थे उन लहरों को। जो कहीं दूर से आकर, टकराती हैं किनारों पर। टूट जाती हैं पास आकर, फिर नई लहरें वेग से आती हैं। मानो साबुन के झाग का उफान आया, पास आकर स्वच्छ जल से धुल गया

Sagar wo kahlata yu

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08 -Mar-2018 Pragya Sankhala Ocean Poems 0 Comments  1,345 Views
Sagar wo kahlata yu

Vishal harday ho jiska Sagar yu kahlata wo Jeev jantu sare yu usme bhi chip jate kyu Neela neela sa sunder Dharti ka anmol ratan lahrata sa wo toh yu Suraj ki kirano me yu khud ko sama leta Kabhi chandani ki chamak me Khud bhi yu naha leta Gumsum kabhi wo yu rahta lahro se bathe wo karta Varsha ritu me wo bhi Apne suro me gaya karta Nadiya aakar usse milti Apne dil ka hal batati Bate wo unse yu kabhi kar liya karta Rup kabhi na badla karta Har rang me dhal jaya karta Jeevan ham bhi yu banaye Uske jaisa jeeya jaye Sagar phir gagar ban jaye

Kinaro se Samandar/ किनारों से समंदर

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21 -Aug-2017 shalu L. Ocean Poems 0 Comments  6,192 Views
Kinaro se Samandar/ किनारों से समंदर

किनारों से समंदर आसमान भी चहेरा देखे इतना फैला है आकार जिसका , उगम की गली न मिलती क्षितिज है अंबर पार उसका , क़यामत तक रिश्ता जुड़ा है साथ उनसे जैसे लहरों का बहते बहते हवा भी थक जाये पता पूछे समंदर पार का. अलग ही दुनिय

Ajab Kavita

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18 -May-2015 Chandan Rathore Ocean Poems 0 Comments  9,385 Views
Ajab Kavita

POEM NO. 225 --------- अजब कविता --------------- वो सोये तो कविता वो जागे तो कविता शब्दों का जनजाल है फिर भी खो रही थी कविता बात ना होती फिर यादों में थी कविता हस रहा ये जमाना और फुट फुट के रो रही कविता कविता ना बोले कविता कई राज खोले लोगों

Sagar Lehar Lehar Leharata

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06 -Nov-2014 Dr. Parshuram Shukla Ocean Poems 7 Comments  13,732 Views
Sagar Lehar Lehar Leharata

सागर लहर-लहर लहराता। एक नर्इ दुनिया दिखलाता। बच्चों इसकी सुनो कहानी, दूर-दूर तक फैला पानी। जीव बहुत से रहते इसमें, जिनका हमसे गहरा नाता। एक नर्इ ............... बादल इससे पानी लाते। आकर धरती पर बरसाते। मोती जैसा रत्न निरा

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