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**पांव भर चुके हैं छालों से**

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13 -Mar-2016 अनन्य Sad Poems 1 Comments  1,131 Views
अनन्य

पांव भर चुके हैं छालों से,
है दिल जख्मी पड़ा मलालों से l


भरी आंखों में बक़रारी है,
जेहन बेचैन है सवालों से l


दिल में अफसुर्दगी का आलम है,
अश्क चीखते हैं नालों से l


एक बिजली सी जबसे कौंधी है,
मुझको नफ़रत है इन उजालों से l


बस इतने ही हम बाकी बचे है,
जैसे घर भर गया हो जालों से l


कैसे उस भूख को मिटाएं अब,
जो भूख पैदा हुई निवालों से l


ऐ दिल! इतना ही बस एहसान कर,
मुझको आज़ाद कर खयालों से l


तू आज उस आह को रिहाई दे,
जो लब पे बैठी हुई है सालों से ll

-Er Anand Sagar Pandey



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1 More responses

  • Vivek Kumar
    Vivek Kumar (Registered Member)
    Commented on 14-March-2016

    Nice!!.

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