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पापा की लाड़ली परी

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10 -Mar-2022 Mehak Jhamb Daughter Poems 0 Comments  209 Views
पापा की लाड़ली परी

पापा की परी हूँ मैं
बेफ़िकर जिया करती हूँ मैं
पापा की गोद में सिर रख कर सोया करती हूँ
पापा की लाड़ली परी हूँ मैं…

अब छोटी से बड़ी हुई मैं
पापा की उंगली पकड कर चली मैं
छोटी छोटी बातों पर रोती हूँ
पापा से उम्मीद रखती हूँ
पापा की लाड़ली परी हूँ मैं..

पापा की लाड़ली अब बड़ी हुई
स्कूल का सफर अब शूरू हुआ
स्कूल जाने से डरती थी
कॉलेज का सफर भी खतम हुआ
पापा की छाया में रहकर पापा की बेटी बड़ी हुई
रहूँगी तो पापा की परी मैं

पापा की परी बड़ी हो गई
अब तो दूसरे घर जाना
पापा पापा बोल कर पूरे घर को चहकाती थी
छोटी सी मुस्कान पापा के होटो में लाया करती थी
पापा की बेटी अब बड़ी हो गई

पापा की बेटी अब चली जाएगी
जाने वो पल कैसा होगा
आँखो में नमी लेकर पापा को छोड़ जाऊँगी
हिम्मत रखना मेरे पापा मिलने आती रह जाऊँगी
आख़िर रहूँगी तो मैं अपने पापा की ही परी ।



Dedicated to
My husband

Dedication Summary
My husband is very emotional for his daughter ❤️

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