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परीक्षाएँ

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20 -Jan-2021 Parmanand kumar Examination Poem 0 Comments  254 Views
Parmanand kumar

परीक्षाएँ
__________________By Parmanand Kumar
Dated 05.05.2005
Patna.

जब आती थी दसवीं तक की परीक्षाएँ
तब मैं बनाता था, बहुत सारी योजनाएँ...
अब जब आती है, उच्च स्तर की परीक्षा
तो देने का मन नहीं करता है इच्छा !

क्योंकि
अब तो प्रतिक्षण होती रहती है परीक्षा
घर में, आँगन में, गली में, सड़क पर
क्या कहूँ, समझीये कि हर सफ़र पर...
बताना हो जाता है मुश्किल...
कि होता है कहाँ कहाँ परीक्षा ?

लक्ष्मी रूठी हो तो दीजिए परीक्षा
लक्ष्मी कृपा हो तो दीजिए स्व_ इच्छा
और लक्ष्मी वर्षा हो तो बिन बैठे ही
हो जायेगी आपकी सारी इच्छा

जमाना तो ऐसा आ गया है कि
पूरी हो जाएगी आपकी अधूरी इच्छा
बस एक बार लग जाए, हाथ लक्ष्मी का

ज़माने के संग संग देखना होगा
आपको.हर एक सपना..
नहीं तो रह जाएगी, धरी की धरी
आपकी अधूरी सपना.....
लाखों में बिकते हैं यहाँ आला अफ़सर
बनना है क्या? आपको सरकारी सेवक?

बचपन की उड़ान, थी बेजुबाँन
अब होश हवास में आई जान
कि रिश्वत का सेंसक्स ऊँचा है
काबिलियत अब भी उसकी जूती है......


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परीक्षाएँ


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