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परिश्रम का बीज

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19 -Jan-2021 Mahesh Kumar Haryanvi Motivational Poems 0 Comments  108 Views
Mahesh Kumar Haryanvi

मेहनत हर ईमान की
यूँ ऐसे रंग लाएगी
व्यर्थ में सूखे बीज से
भी हरितक्रांति आएगी।

सोच-खोज कब कौन चला
नियमित पथ हर रोज ढला
जिंदा आग जला के देख
मरके तो हर मुर्दा जला।

धुंआ बन जब नीर उड़े
प्यास तभी बुझ पाएगी
व्यर्थ में सूखे बीज से
भी हरितक्रांति आएगी।

है धूप उजाला साया का
सच संगत की काया का
तू इसमें हाथ भिगोते जा
श्रम के बीज यूँ बोते जा।

लालच की है चाह बुरी
संग बारिश बह जाएगी
व्यर्थ में सूखे बीज से
ही हरितक्रांति आएगी।

© महेश कुमार

परिश्रम का बीज


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