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परियों का शहर /pariyon ka shaher

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17 -Jul-2017 shalu L. Fairy Poems 0 Comments  2,258 Views
परियों का शहर /pariyon ka shaher

परियों का शहर

छोटी सी इस जिंदगी के छोटे से एक सपने में बसा एक सपना है
परियों का कोई देश है जहाँ उड़ते उड़ते पंखों से कदम रखना है,
कहानियों की परियां रहती आसमान से भी दूर है
जाना बस जाना है मुझे उस जगह जो दादी कहती भूररर है.

कोहरा छाया झील में धुँए में छिपा कोई चोर है,
तितली बैठी फूल पर तो गुदगुदी करता भोर है
उड़ता उड़ता आता बगुला झाड़ू पर करता सैर है
जाना बस जाना है मुझे उस जगहा जो दादी कहती भूररर है.

खेले नन्ही परियां छिपान छिपाई बादल जैसे दीवार है
छड़ी गूमऊ गम हो जाऊ पल में यहाँ पल में उस पार है
चंदा पर झुलु खुलकर लगे जैसे प्यारी नानी के घर है
जाना बस जाना है मुझे उस जगहा जो दादी कहती भूररर है.



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