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पर्यावरण बचावो प्यारे

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01 -Jun-2021 rtripathi Environment Poems 0 Comments  249 Views
rtripathi

"पर्यावरण बचावो प्यारे"

मौसम सुखे बादल रूठे माटी सूखी
आंसू की बारिश,बंजर फसले
हरियाली मैं कैसे लाऊँ
उनके सूखे होटो पर,उपले जैसे चेहरों पर
कर्ज में डूबे खेतो पर,सविधान की डाली में
हरियाली मैं कैसे लाऊँ।।

कैसे चाहूँ परिपाटी मे मिल जाना
कैसे चाहूँ बिन उर मिले,उसे गले लगाना
अपनी राहों के शूलो को
अपनी चाहत के फूलों को
कैसे तुझ पर अर्पण कर दूँ
बोल पिये,इस सूखी भू पर
कैसे मैं हरियाली कर दूँ।।

मौसम आये,बारिश आये
पर,उससे पहले हे मानव! तेरी लालच जाये
जो कंक्रीट का जंगल तूने खड़ा किया
मानवता को भौतिकता का रूप दिया
पैसा मंजिल पैसा प्यार पैसा जीवन का संसार
जो मायावी बातें तूने गाढ़े रगं में पोती है
अपने जीवन के भविष्य को रूप दिया जो तूने है
सच मानो हे भौतिक प्राणी! परिणाम बडा निर्मम होगा।।

ठहरों प्राणी!चल प्रण करे,जीवन का अन्तिम विकल्प धरे
कि,पर्यावरण बचाना है, मानवता को नया सृंगार कराना है
अभी बुरा न बहुत हुआ है, समझो प्यारे
पर्यावरण बचावों प्यारे,हरियाली को लाओं प्यारे।।

ऋषभ त्रिपाठी

पर्यावरण बचावो प्यारे


Dedicated to
मेरे सभी प्यारे भाई बन्धुओ को

Dedication Summary
पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ साथ पर्यावरण के प्रति सजग करने के लिए

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