Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

गुलिस्ताँ

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17 -May-2019 satyadeo vishwakarma Patriotic Poems 0 Comments  64 Views
गुलिस्ताँ

गुलिस्ताँ कितने ज़ुल्म झेले हैं , दोस्ती निभाने में । हाथ जल गए मेरे उसका घर बंचाने में । दुश्मनों से जीती जंग दोस्तों से हारा हूँ , दोस्त सबसे आगे थे नश्तर चुभाने में। नफ़रतों के सौदागर तुम आज भी अकेले हो, अब तक हारत

आँगन भारत माँ का

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28 -Apr-2019 Naveen Kumar Patriotic Poems 0 Comments  68 Views
आँगन भारत माँ का

कल-कल करती नदियाँ हो, और झर-झर गिरता झरना हो। अमराई में कोयल की वो, सात सुरों का गायन हो ।। मैं जहाँ जन्म ले पलू-बढ़ूँ, वो आँगन भारत माँ का हो ।। जिसकी सरहद की रक्षा में, खुद पर्वतराज हिमालय हो। आदिकाल से स्वार्थरहित,

32 मात्रिक छंद "जाग उठो हे वीर जवानों"

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21 -Apr-2019 Naman Patriotic Poems 0 Comments  215 Views
32 मात्रिक छंद

32 मात्रिक छंद "जाग उठो हे वीर जवानों" जाग उठो हे वीर जवानों, तुमने अब तक बहुत सहा है। त्यज दो आज नींद ये गहरी, देश तुम्हें ये बुला रहा है।। छोड़ो आलस का अब आँचल, अरि-ऐंठन का कर दो मर्दन। टूटो मृग झुंडों के ऊपर, गर्जन करत

Jaliyan wala bag

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13 -Apr-2019 Harjeet Nishad Patriotic Poems 0 Comments  304 Views
Jaliyan wala bag

Rakt se lathpath hua tha ye Jaliaya walan bag. Is mitti per aaj bhi hain lal lahu ke dag. General Dayer ne kiya tha nihatthon per var, Amer shahidon ki dharati hai Jaliyan walan bag. Terah April san unnis sau unnis ki hai bat. Char sau se adhik per hua tha pranaghat. Swatantrata sangram per hua aser iska , British shashan ke ant ki ho gai shuruwat. Yad rahegi ger kurbani desh ye tabhi bachega. Shatru parajit hoga unnat Bharat desh banega. Shraddhajali samarpit unko yad rakhenge her pal, Desh ka bachcha bacha mere desh ki shan banega.

आँसू छंद "कल और आज"

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06 -Apr-2019 Naman Patriotic Poems 0 Comments  118 Views
आँसू छंद

आँसू छंद "कल और आज" भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में। तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में। बल पे विपुल ज्ञान के ही, जग पर शासन फैलाया। कितनों को इस संपद से, तूने जीना सिखलाया।।1।। तेरी पावन वसुधा पर, नर-र

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