Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Patte (पत्ते)

0
30 -Nov-2016 Suresh Chandra Sarwahara Nature Poem 0 Comments  4,442 Views
Suresh Chandra Sarwahara

पत्ते
- - - - - - - - - -
थिरक रहे हैं आज शाख पर
कल तक तो गिर जाने पत्ते,
अपनी धुन में झूम रहे हैं
हर दुःख से अनजाने पत्ते।
नहीं सताती इनको चिंता
पतझर भी आने वाला है,
वासन्ती ऋतु के ही हरपल
गाते रहते गाने पत्ते ।
आतप में रहते हैं शीतल
सर्दी को भी हँसकर सहते,
वर्षा में तो बच्चे बनकर
लगते खूब नहाने पत्ते।
वायु प्रदूषित पीकर जग की
धूल धुएँ को झेल रहे हैं,
मैंने पूछा कैसे हो तो
लगे सभी मुस्काने पत्ते।
विष पीते हैं शंकर जैसे
सदा सुधा देते औरों को,
जीवन जीना सिखा रहे हैं
हमको इसी बहाने पत्ते।
*****
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"

Patte (पत्ते)


 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017