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पत्तियाँ

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21 -Feb-2018 Suresh Chandra Sarwahara Nature Poem 0 Comments  909 Views
Suresh Chandra Sarwahara

लगी हुई पेड़ों के ऊपर
कितनी सारी ढेर पत्तियाँ।
इनसे ही ये पेड़ हरे हैं
लगते सुन्दर भरे भरे हैं,
गर्मी में भी इनके कारण
तेज धूप से नहीं डरे हैं।
आँधी पानी को सहती हैं
बनकर घेर घुमेर पत्तियाँ।
पंछी इनमें आ छुप जाते
फुदक फुदक कर जी बहलाते,
इनकी हरियाली आभा को
आँखों से रहते सहलाते।
दूर कहीं जब जाते पंछी
तकती कितनी देर पत्तियाँ।
धूल धुआँ अपने में भरती
हवा शुद्ध भी ये ही करती,
तापमान को कर अवशोषित
शीतल रखती अपनी धरती।
छाँव दूसरों को देने में
कभी न करती देर पत्तियाँ।
पतझर का जब मौसम आता
तन मन इनका सिहरा जाता,
झर जाती हैं पीली पड़कर
टूट पेड़ से जाता नाता।
हँस हँस मिट्टी में मिल जाती
देख समय का फेर पत्तियाँ।
******
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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