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Dil Ka Karaar

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06 -Sep-2015 Rahul Sharma Peace Poems 0 Comments  1,167 Views
Dil Ka Karaar

अब धुआं सा छंटा जा रहा है
ज़िन्दगी का मज़ा आ रहा है
गम के बदल बरस के हैं लौटे
गम का सैलाब भी जा रहा है
फिर से खुशबु फ़िज़ा में है लौटी
हुस्ने कुदरत कहर ढा रहा है
सोई उम्मीदें फिर से हैं जागी
हौंसला भी बड़ा जा रहा है
अब ज़माना ये जन्नत लगे है
सब पे नूर ए खुदा छा रहा है
कोई शिकवा नहीं है किसी से
मेरे दिल को करार आ रहा है



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