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पेड़ / Ped

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18 -Jan-2019 Suresh Chandra Sarwahara Tree Poems 0 Comments  839 Views
Suresh Chandra Sarwahara

खड़े हुए हैं बिना थके ये
रात दिवस हरियाले पेड़,
कितने कितने फल देते हैं
लेकिन खुद तो एक न चखते,
चाहे कोई कुछ भी करता
इससे तनिक न मतलब रखते।
नहीं किसी की करें शिकायत
मुँह पर धारे ताले पेड़।
खुले गगन के नीचे पलते
आतप वर्षा आँधी सहते,
नहीं कभी देखा है इनको
अपना दुःख औरों से कहते।
झूमा करते तूफानों में
पीकर विष के प्याले पेड़।
औरों को देते रहते हैं
छाँव सुहानी अपनी शीतल,
एक जगह ही खड़े हुए हैं
ठाँव न बदलें होकर चंचल।
थके हुए लोगों में भरते
आशा भरे उजाले पेड़।
प्राणवायु देते ये हमको
पर इनके प्राणों पर संकट,
अगर रहे ना पेड़ धरा पर
तो समझो सबका अंत निकट।
वर्षा से ये अन्न उगाते
देते हमें निवाले पेड़।
*******
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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