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पेड़ का मन / ped ka mann

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25 -Mar-2017 shalu L. Tree Poems 0 Comments  1,793 Views
पेड़ का मन / ped ka mann

पेड़ का मन
बहोत खुशियां लहेरा उठी, जब पेड़ पर से हवा चली ,
पंख खोल पक्षियों ने, उड़ान भरने की तैयारी चली ,
बहार झूमे सावन में , हसीं गीत खुशियो के गाने लगी ,
इतनी हरियाली छायी जैसे,जीने की नयी उम्मीद जगी।

सुन्दर छाया मे बैठ पेड़ की , श्याम ने मधुर बंसी बजाई,
दूर ग्वालों, गैयों संग राधा भी, काम सुध सब भूली सुहाई,
झूला- झूले में बैठ सखियां भी ,बहार खिली बसंत संग लायी,
कौन जाने किस गली से भर, पुरवा ले आयी मस्त पुरवाई।

खुश है पेड़ इतना की भुला सब ,मौसम के संकट एक पल में ,
जिंदगी है मेरी दुसरो के लिए छाया मेरी रहत बैठे पास में,
मैं रहूँ उसका ही सदा जिसने अपना बनाया आँगन में ,
फल पंक्षी नन्हे कदम रहे खुशहाल मेरे इस आवास में।

आयी गर्मी तप गया मौसम आब जरा समय नम है ,
खाली मेरी डाली तो पत्ते पंक्षी का आना जाना भी काम है ,
आएगी वर्षा करूँगा फिर से श्रृंगार इतना मुझमे दम है ,
बस तोड़ न दे मुझे कोई के कुल्हाड़ी धार अब गरम है.

लो खिल उठा हूं फिर से मुस्कुरा उठी माँ मेरी गीली माटी ,
साँसे मेरी तुम्हारी हसीं खुशियो से ले आओ सब बाराती ,
बांधो झूले, घर, फल मधुर और क्या तुम में दोस्त हालति,
जब तक सृष्टि चले नाता रहे हमारा हम जैसे जीवन साथी।
shalu.L.



Dedicated to
nature love

Dedication Summary
nature don't say something but do everything

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