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फूल और घास

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02 -Jul-2017 Suresh Chandra Sarwahara Flower Poem 0 Comments  958 Views
Suresh Chandra Sarwahara

फूल और घास
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खिले घास के ऊपर देखो
कितने सुन्दर फूल,
इन्हें देख लगता जीवन में
सब कुछ ही अनुकूल।
भूल सभी दुःख जाते हैं हम
इन दोनों को देख
मिट जाती मस्तक ऊपर से
चिन्ताओं की रेख।
देख देख कर हरी घास को
शीतल होती आँख,
और फूल की सुन्दरता से
झूमे तन की शाख।
सुखमय जीवन का प्रतीक है
हरी भरी यह घास,
रंग बिरंगे खिले फूल हैं
मन का ही उल्लास।
भूल सभी दुःख जैसे बालक
बिखराता मुस्कान,
वैसे ही यह फूल घास भी
करते खुशी प्रदान।
******
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"

फूल और घास


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