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पिंजरा (Abbas)

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01 -Apr-2020 Abbas Bohari Natural Disasters Poems 0 Comments  76 Views
Abbas Bohari

मालिक ने बनाये ज़मीन ओ आसमान
बसाये चरिंदे दरिंदे परिंदे इंसा मेहमान

जल थल वायु में सबका बराबर हिस्सा
अम्नो प्रेम से चलता रहा बरसो किस्सा

लालच में आकर इंसा ने लगाई अक्ल
मचाकर तबाही बदली धरती की शक्ल

घने हरे भरे जंगल होते गए सफ़ाचट
इट बजरी की इमारते उभरी फ़टाफ़ट

आतंक और दहशत के उभरते विकार
मूक प्राणियों का किया बेख़ौफ़ शिकार

सांसारिक लोभ का इंसा बन गया प्यादा
बढ़ता गया अधर्म की ओर और ज्यादा

अवचेतन भूलता गया परम् परमेश्वर
समझकर आत्मनिर्भर बन बैठा ईश्वर

जगत स्वामी दिखा रहा तेरा सही स्थान
भोग अपने गंभीर अपराधों के कारस्थान

पंछी उड़ रहे स्वछंद खुले नीले गगन तले
तू बैठा कैद में लगाकर कारोबार पर ताले

अब मान भी ले अपनी हार ले सीधी राह
थामकर प्रभु का सहारा बना उसे हमराह

दे दृष्टि पिंजरे में फड़फड़ाये अब्बास बेताब
तू दिखेगा इसी सृष्टि में कहे धर्म की किताब



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