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Pinjra /पिंजरा

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07 -Nov-2020 shalu L. Motivational Poems 0 Comments  349 Views
Pinjra /पिंजरा

पिंजरा
पंशियो का पंखो से नाता तोड़ कर
उसे जीते जी लाचार करे तू,
देख उदासी उनकी रोने पर भी हँसे तू
आसमा में उड़ने के हौसले पंशी के
शौक़ से जिंदगी पिंजरे में कैद करे तू।
सोच
अपनी भी एक जिंदगी है
जिसका अपने ही कर्मो से नाता है
लौट आता है पल वहीँ बस वक्त बदल जाता है
बदलाव किया जा सकता है
पिंजरा से भी उड़ाया जा सकता है
रिश्ता बन जाये दिल का तो आसमा से भी पंशी लौट आता है।
जिंदगी को चार दीवारों में कैद ना समजो
ये ब्रम्हांड का अंश है जो तुम्हे साथ लाया है।
बस हौसले उड़ान भरने के रखो पंशियो संग तुम्हें भी उड़ जाना है।
Shalu L.

Pinjra /पिंजरा


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