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पिता द्वारा बेटी को सीख....

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01 -Mar-2017 Piyush Raj Wedding Poems 6 Comments  5,184 Views
Piyush Raj

पिता द्वारा बेटी को सीख......

जितनी नाजों से थी पली
अपने पिता की नन्ही कली
जिस आँगन में खेलती थी
गुड्डे-गुड़ियों का खेल
आज वो बेटी दुल्हन बन
बाबुल का घर छोड़ चली

बेटी को विदा करते वक़्त
पिता के आँखों से बह रही अश्रु की धारा
आज उससे हो रहे है दूर
जो थी उनकी आँखों की तारा

विदा करते वक़्त बेटी को
सिखा रहे है उसके पिता
बेटी,तेरे पति है राम जैसे
और तुमको बनना है उनकी सीता

जाकर तुम ससुराल में
रखना सबका ध्यान
छोटे-बड़े सबों का
करना हमेशा सम्मान

हर वक़्त ससुराल में
ये रखना हमेशा ख्याल
मेरे दिए हुए संस्कारो पर
कभी ना उठे कोई सवाल

सास-ससुर और ननद-देवर के
पूरे करना हर सपने
आज से वे ही है तुम्हारे अपने

तुझे विदा करने को तो
नहीं करता है मेरा मन
पर मैं भी क्या कर सकता हूँ
हर बेटी तो होती है पराया धन.....



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6 More responses

  • poemocean logo
    AVivek (Guest)
    Commented on 24-March-2017

    very very nice poem h yar mast likhe ho.

  • Mamta Rani
    Mamta Rani (Registered Member)
    Commented on 18-March-2017

    Verry nice poem.

  • poemocean logo
    Rashmi (Guest)
    Commented on 16-March-2017

    बहुत ही सुंदर रचना .......

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    Bishnu kumar (Guest)
    Commented on 12-March-2017

    mast poem h very nice ......

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    Ayush (Guest)
    Commented on 09-March-2017

    bahut hi sunder kavita h ,.......

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    Priya Kumari (Guest)
    Commented on 06-March-2017

    very very nice poem really I like it .......

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