Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

सावधान हो जा मतदाता अब परधानी आवत बा

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23 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Politics Poem 0 Comments  224 Views
सावधान हो जा मतदाता अब परधानी आवत बा

सावधान हो जा मतदाता/प्रधान अब परधानी आवत बा सब प्रत्याशी के पैर में चक्र, कुछ याद दियावत बा। सावधान हो जा मतदाता अब परधानी आवत बा। केहू के अईले से कुटुम्ब प्रसन्न ,केहू फूटी आंख न भावत बा। सावधान हो जा मतदाता अब पर

जिधर देखिये बस उधर खा रहे हैं

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22 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Politics Poem 0 Comments  146 Views
जिधर देखिये बस उधर खा रहे हैं

इधर खा रहे हैं उधर खा रहें हैं। मायापति अचम्भित किधर जा रहे हैं। न पूछो तमन्ना चखूल्लड़ की अबतो, जिधर देखिए बस उधर खा रहे हैं। मदिरा और बकरा के नीचे न माने। जो दे खिला बस उसी को हैं जाने। घर वाले टोके तो लगता बेमानी क

चारा दे कर मारे गा

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15 -Mar-2021 Aman Arora Politics Poem 0 Comments  109 Views
चारा दे कर मारे गा

भवर जब भी डुबोये गा, उभारा दे कर मारेगा भवर जब भी डुबोये गा, उभारा दे कर मारेगा ऐ मछलियों वो तुम को चारा दे कर मारेगा और नादान दुनिया है, समझती है अच्छे दिन भी आयेगे बड़ा शातिर वो खिलाडी है सहारा दे कर मारेगा अभी पूछो

एक अहसास

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12 -Feb-2021 Sharma Politics Poem 0 Comments  161 Views
एक अहसास

बीते साल के तोहफे इस साल मिले हैं ! खंगाल ली गई सब मछलियां तालाब किनारे कुछ फ़टे पुराने जाल मिले हैं! छोड़ दी उसने तलाश गुम शुदा बेटे की जब से गन्दे नाले से कुछ नर कंकाल मिले हैं! ? उठ रहा है बस्तियों से धुआं अब तक यूं का

भ्रष्टाचार

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03 -Feb-2021 bharat Politics Poem 0 Comments  151 Views
भ्रष्टाचार

चाहे जितना जोर लगा लो, कितना भी जन गण मन गा लो... कितनी भी योजना बना लो, समिति बना लो, बजट बना लो... भारत आगे नहीं बढ़ेगा जब तक छिद्र नहीं रोकेंगे... नाव डूब जानी है निश्चित यदि जल श्रोत नहीं रोकेंगे... भ्रष्टाचार जड़ों मे

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