Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

भ्रष्ट राजनीती।

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27 -Apr-2022 Harpreet Ambalvee Politics Poem 0 Comments  50 Views
भ्रष्ट राजनीती।

ये कौन है, जो नई फसलों की जड़ों को हिला रहा है ये कौन है, जो धर्म जाति के नाम पर नफरत फैला रहा है, ये कौन है, जो हिंद की नींव से खिलवाड़ कर रहा है, ये कौन है जो युवाओ मे नशे, लड़ाई के बीज भर रहा है, ये कौन है जो नई मजबूत दीवा

कविता : आओ हम मतदान करें

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16 -Feb-2022 Prabhat Pandey Politics Poem 0 Comments  63 Views
कविता : आओ हम मतदान करें

शिक्षा ,दीक्षा और चिकित्सा इनके साधन अब बटे बराबर असन ,वसन ,आवास सुलभ हों सांसे पलें न फुटपाथों पर पूर्ण व्यवस्था बने समुज्ज्वल ऐसा कुछ प्रयास करें तुच्छ स्वार्थ से ऊपर उठकर आओ हम मतदान करें || भय ,आतंक और हिंसा से

साहब

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22 -Jan-2022 Dhirendra Panchal Politics Poem 0 Comments  245 Views
साहब

इन वर्दियों में कौन से धागे लगाते हैं । गर्मियां वे बस गरीबों पर दिखाते हैं । ठेलों से उठा लेते हैं वो अंगूर के दाने । जैसे बाप का हो माल वैसे हक जताते हैं । सरपट बैठ जाते हैं दरोगा पांव में जाकर । इन्हें सफेद धागे स

बनल रहा बरियार मोदी जी

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11 -Nov-2021 Dhirendra Panchal Politics Poem 0 Comments  247 Views
बनल रहा बरियार मोदी जी

छूट गइल कुल यार संघाती , घरवां के परिपाटी । दिन से भइली हीन गाँव क गरियावेले माटी । धय धय लोला दाबेले सरकार मोदी जी । राम करें तूं बनल रहा बरियार मोदी जी । चिक्कन चिक्कन बात तू खाली टीबी से बतियावा । समय के मारल लइकन

तालिबान अफगान हकीकत

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23 -Aug-2021 nil Politics Poem 0 Comments  469 Views
तालिबान अफगान हकीकत

तालिबान: अफ़गान हकीकत जन- सेना सरकार ने, सींचा भृष्टाचार तालिबान आतंक को,मिला सुदृढ़ आधार पाक पड़ोसी ने दिया,दोनों हाथों साथ चीन चाल चूका नहीं,तुरत मिलाया हाथ ' गनी' पलायन कर गया,बिना किए प्रतिकार और साथ में ले गया

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