Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

बेजुबान

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24 -May-2022 Dhirendra Panchal Politics Poem 0 Comments  201 Views
बेजुबान

बेजुबानों को बचाने की गजब साजिश चली , देखकर व्यापार मरघट को पसीना आ गया । देखते ही देखते तकनीक ऐसी आ गई , छेदकर नथुनों को हमको दूध पीना आ गया । हो गए हैं बन्द बूचड़खाने जो अवैध थे , वैध वाले हंस रहे हैं क्या जमाना आ गया

राजनीतिक दोहे।

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21 -May-2022 Harpreet Ambalvee Politics Poem 0 Comments  48 Views
राजनीतिक दोहे।

हिंदू, मुस्लिम देश में करते रहो, व्यस्त रहे सब लोग, ना महंगाई पर कोई बात हो, नेता करते रहे हैं सब भोग, 400 से सिलेंडर पार हुआ, स्मृति की स्मृति हो गई थी मूढ़, आज 1000 के पार हुआ, लाए कोई उस देवी को कोई ढूंढ, रोजगार की बात ना, इन

भ्रष्ट राजनीती।

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27 -Apr-2022 Harpreet Ambalvee Politics Poem 0 Comments  98 Views
भ्रष्ट राजनीती।

ये कौन है, जो नई फसलों की जड़ों को हिला रहा है ये कौन है, जो धर्म जाति के नाम पर नफरत फैला रहा है, ये कौन है, जो हिंद की नींव से खिलवाड़ कर रहा है, ये कौन है जो युवाओ मे नशे, लड़ाई के बीज भर रहा है, ये कौन है जो नई मजबूत दीवा

कविता : आओ हम मतदान करें

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16 -Feb-2022 Prabhat Pandey Politics Poem 0 Comments  111 Views
कविता : आओ हम मतदान करें

शिक्षा ,दीक्षा और चिकित्सा इनके साधन अब बटे बराबर असन ,वसन ,आवास सुलभ हों सांसे पलें न फुटपाथों पर पूर्ण व्यवस्था बने समुज्ज्वल ऐसा कुछ प्रयास करें तुच्छ स्वार्थ से ऊपर उठकर आओ हम मतदान करें || भय ,आतंक और हिंसा से

साहब

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22 -Jan-2022 Dhirendra Panchal Politics Poem 0 Comments  438 Views
साहब

इन वर्दियों में कौन से धागे लगाते हैं । गर्मियां वे बस गरीबों पर दिखाते हैं । ठेलों से उठा लेते हैं वो अंगूर के दाने । जैसे बाप का हो माल वैसे हक जताते हैं । सरपट बैठ जाते हैं दरोगा पांव में जाकर । इन्हें सफेद धागे स

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