Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

तालिबान अफगान हकीकत

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23 -Aug-2021 nil Politics Poem 0 Comments  312 Views
तालिबान अफगान हकीकत

तालिबान: अफ़गान हकीकत जन- सेना सरकार ने, सींचा भृष्टाचार तालिबान आतंक को,मिला सुदृढ़ आधार पाक पड़ोसी ने दिया,दोनों हाथों साथ चीन चाल चूका नहीं,तुरत मिलाया हाथ ' गनी' पलायन कर गया,बिना किए प्रतिकार और साथ में ले गया

युग बोध

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15 -Jul-2021 Sharma Politics Poem 0 Comments  95 Views
युग बोध

युगबोध ------------ लाशों जैसे बहते जाना सब कुछ गुप् चुप सहते जाना!! ना राजी से राजी होकर कमजोरों का काजी होकर लूटतंत्र का गाज़ी होकर जय हो जय हो कहते जाना!! कातर कुत्तों की सरदारी दर दर - दुर दुर सहने की लाचारी खसम बनाकर के व

कठपुतलियां

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15 -Jul-2021 Sharma Politics Poem 0 Comments  149 Views
कठपुतलियां

कठपुतलियां *********** कठपुतलियों का अपना कोई वजूद नही होता ! पर्दे के पीछे से मिले इशारे पर उछलती कूदती और नाचती हैं कठपुतलियां ! कैसे नचाना है? कितना नचाना है? कब नचाना है? बस नचाने वाले के हुक्म को बजाती हैं कठपुतलियां

भेडें

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24 -Jun-2021 Sharma Politics Poem 0 Comments  239 Views
भेडें

वक्त आ गया है भेड़ें भी सीख ले नन्हे कोमल खुरों की जगह तेज़ धारदार नाखून उगाना औऱ तनिक गर्दन उठा कर चलना वरना यूं ही छली जाती रहेंगी भेड़ियों की पैरवी करने वाले चतुर सियारों द्वारा ! कब तक सजाती रहेंगी भेड़ें अपनी ऊन औ

सावधान हो जा मतदाता अब परधानी आवत बा

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23 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Politics Poem 0 Comments  506 Views
सावधान हो जा मतदाता अब परधानी आवत बा

सावधान हो जा मतदाता/प्रधान अब परधानी आवत बा सब प्रत्याशी के पैर में चक्र, कुछ याद दियावत बा। सावधान हो जा मतदाता अब परधानी आवत बा। केहू के अईले से कुटुम्ब प्रसन्न ,केहू फूटी आंख न भावत बा। सावधान हो जा मतदाता अब पर

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