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Kai Mit Gaye

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11 -Apr-2014 KALYAN SINGH CHOUHAN Politics Poem 0 Comments  909 Views
KALYAN SINGH CHOUHAN

---कई मिट गये----

कई मिट गये क्योकि वो थे अजीब
गरीब न पा सका अमीरी का नसीब
अमीर-अमीर गरीब है ओर गरीब
अ-इन्सान मे भेद,मतभेद करने वालो
जातपात की भावना जागते हो
आरक्षण पर उत्पात मचाते हो
महंगाई ओर भ्रस्टाचार पे अंकुश न लगाते हो
तुम तो केवल मुददे जिन्दा रख
अन्ना-अरविन्द-रामदेव बनाते हो
क्योकि संसद मे तुम लात-घुसे चप्पल चलाते हो
पिलाकर गरीब को कुए बावड़ी का पानी
खुद आर ओ के पानी से नहाते हो
एक बार जाकर वापस फिर आते हो
लेकिन गाँव छोड़ शहर ही शहर चमकाते हो
अपने किये पे क्यो नही शर्माते हो
आये दिन एक नया संविधान बनाते हो
तुम इतना क्यो इठलाते हो
इन्सान होकर इन्सान से इतराते हो
जब हम तुम्हारे तुम हम्हारे
अपनाओ सफलता के तीन रहस्य
योग्यता -साहस से बदलने की जरा सी कोशिश
अपने ही ज़माने को क्यो सबक सिखलाना चाहते हो
अगर यु ही करते रहे-न होगा कोई करीब
दुनिया होगी अजीब-तारीफ भी न होगी नसीब
अकेलापन होगा अजीब
अरे -खुद को न बता पाओगे अपना ही नसीब
कई मिट गये क्योकि वो थे अजीब
गरीब न पा सका अमीरी का नसीब

kavikalyanraj@yahoo.in
Kalyan Singh chouhan
99280-43855



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