Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

प्रकृति

0
30 -Apr-2016 Dheeraj Sharma Nature Poem 2 Comments  5,497 Views
Dheeraj Sharma

प्रकृति

धीरज शर्मा द्वारा रचित

प्रकृति। धरा पर कुछ भी अपने लिए नहीं करती,
नदियाँ पहाड़ों से अपने लिए नहीं उतरती|

चाँद सूरज भी कहाँ अपने लिए चमकते है?
प्यार भरे दिल भी दूसरों के लिए धड़कते है|

फूल- वृक्ष की डाली अपने लिए नहीं फलती,
प्रकृति धरा पर कुछ भी अपने लिए नही करती|

मनुज तू ही क्यूं फिर अपने में लगा रहता है?
इस धरा की धारा में तू क्यूं नहीं बहता है?

यह इक बात है मेरे गले से नहीं
उतरती,
प्रकृति तू हमको भी क्यूं अपना -सा नही करती?

प्रकृति धरा पर कुछ भी अपने लिए नहीं करती,
नदियाँ पहाड़ों से अपने लिए नहीं उतरती|

बहे पवन फिर महके उपवन सभी के वास्ते
चले गगन फिर बरसे जल -धन सभी के वास्ते|

दिखाती राह सच्चार्इ बने खुशी की परछाई,
करे प्रकाश लौ दीपक की सभी के वास्ते |

रोशन आग काले अँधेरों के लिए होती ,
चमक सितारों की भी अपनी लिए नहीं होती|

रात तेरे बाद सुबह होने से नहीं मुकरती,
प्रकृति धरा पर कुछ भी अपने लिए नहीं करती|

पढ़ने के लिए धन्यवाद |



Dedicated to
Dedicated to nature

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

2 More responses

  • poemocean logo
    Uv (Guest)
    Commented on 30-June-2018

    Nice.

  • poemocean logo
    Savita (Guest)
    Commented on 12-September-2016

    Bahut sunder aur saras kavita.

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017