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प्रकृति की प्रवृत्ति

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17 -May-2020 Mamta Rani Environment Poems 0 Comments  356 Views
Mamta Rani

प्रकृति की प्रवृत्ति है निरंतर बढ़ते रहना
धरा पे हो अनुचित प्रवृत्ति सब सहते रहना

सब बच्चों को प्यार स्नेह वो देती है
सबका बोझ उठाती है माता वो कहलाती है

करती नहीं है वो किसी में भेदभाव
सबको एकसमान हवा देना है स्वभाव

प्रकृति हमें सब कुछ निरंतर देती रहती
लेती ना हमसे कुछ फल-फूल सब देती रहती

सूर्य चन्द्रमा देते प्रकाश तारे भी टिमटिमाते हैं
हवा हो या हो बरसात सभी अपना योगदान देते हैं

दया,क्षमा वो रखती है परोपकार सबपे करती है
पेड़ शीतलता देती राहगीरों की थकान हरती है

नदी अम्बर और पेड़ पौधे ईश्वर ने क्या खूब बनाया
चिड़ियों की चहचाहट से धरा को सुरमय बनाया

ममता रानी



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