Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

प्रार्थना

0
23 -Aug-2016 Dr. Swati Gupta Krishna Janmashtami Poems 1 Comments  1,596 Views
Dr. Swati Gupta

कान्हा, अब फिर से तुमको इस धरती पर आना है,
अपने नए अवतार से इस दुनिया को आज बचाना है।
राक्षसों ने जब अपने आतंक से,पृथ्वी पर कोहराम मचाया था,
मनुष्य सहमे डरे हुए थे,देवों को भी कुछ समझ न आया था,
तब लिया अवतार प्रभु राम का तुमने,
रावण राज्य से इस संसार को मुक्त कराया था।
अधर्म का नाश किया था तुमने, धर्म का मान बढ़ाया था,
कान्हा, अब फिर से तुमको इस धरती पर आना है,
अपने नए अवतार से इस दुनिया को आज बचाना है।
कंस के अत्याचारों से जब त्रस्त हुआ संसार था,
त्राहि त्राहि मची हुई थी, पापों का बढ़ता भार था,
तब लिया अवतार कृष्ण का तुमने,
कंस के अत्याचारों से इस संसार को मुक्त कराया था,
पाप का अंत किया था तुमने, पुण्य का मान बढ़ाया था,
कान्हा, अब फिर से तुमको इस धरती पर आना है,
अपने नए अवतार से इस दुनिया को आज बचाना है।
आज फिर से फैला हुआ आतंक का साम्राज्य है,
हिंसा, अन्याय और पाप के बोझ से बढ़ गया पृथ्वी पर भार है,
नए अवतार में आकर पृथ्वी को इस भार से मुक्त कराना है,
कान्हा, अब फिर से तुमको इस धरती पर आना है,
अपने नए अवतार से इस दुनिया को आज बचाना है।।
By:Dr Swati Gupta



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

  • poemocean logo
    Anmol (Guest)
    Commented on 23-August-2016

    Thanks to poem.

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017