Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

पूंछ रहे हैों सोन चिरैया

0
08 -Mar-2020 nil Social Events Poems 0 Comments  1,209 Views
पूंछ रहे हैों सोन चिरैया

महिला सशक्तीकरण और महिला दिवस के सन्दर्भ में डॉ. आनंद की रचना में सोनचिरैया को नारी का प्रतीक मानकर यह बताने /संदेश देने का प्रयास किया गया है की कोरोना के लक्षण क्या और उनसे बचकर कैसे
खुशियाँ (होली ) मनाकरखुशियाँ लूटी जा सकती है :
पूंछ रही है सोनचिरैया ?
रंग गुलाल उड़ रहा देखो ,मना रहे हैं सब होली
पूंछ रहे हैों सोन चिरैया ,कैसे मनाऊँ मैं होली

सोनचिरैया ने जब देखा ,बाच रहा हूँ मैं अखबार
सहमी सहमी डरकर बोली ,कोरोना की हुई शिकार
खांसी ताप अटपटी बोली ...

रोनी सूरत मूरत देखी ,मैंने कहा सुनो उपचार
योग गुरूजी का है कहना ,योग ध्यान होगा उपहार
मोबाइल पर सुनना बोली ...

अफबाहों से मत घबराना ,तंत्र समूचा देगा साथ
अस्पताल में भरती होंना ,औषधियां थामेंगे हाथ
होकर स्वस्थ मनाना होली .

..
कान् खोलकर सुनना बहिना, सीधी सच्ची मेरी राय
अपने ही घर आँगन रहना ,कोरोना वायरस पछताय
रंग गुलाल से भरना झोली
जी भर खूब मनाना होली ....
[भोपाल :०७ .०३..२०२०]

टिपण्णी :उक्त रचना का सार संदेश श्रोतायों /जन सामान्य तक पहुचाना
कौन सा अपराध है ,किस को क्या कहा जाय .कृपया सुझाव दें :
निदक नियरे राखिए ....को ध्यान में रखें ..
मैं लग भाग ८६ वर्षीय सीनियर वरिष्ठ नागरिक लगभग २६ कृतियों का लेखक होने की पात्रता रखता हूँ पहली कृति १९६२ में देहली से छपी जिसके पांच संस्करण निकल गए अगला इन्तजार कर रहा है .आजकल बच्चे की मानसिकता में उतरकर बाल साहित्य में डूब नहा रहा हूँ ...
आपके सुझावों की प्रतीक्षा में ..भूल चूक ...



Dedicated to
JIGYASA@YAHOO.COM

Dedication Summary
समसामयिक रचना

 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017