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पुलवामा

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08 -Sep-2019 हर्षवर्धन उपाध्याय Patriotic Poems 0 Comments  606 Views
पुलवामा

पुलवामा

अब भारत माता भी अपना केश नही धूलेगी।
पहले अब दुशासन की चिता जलेगी ll

हद हो गई है उन आतंकवाद के संगठनो की।
आम तौर पर होने वाली काशमीर के घटनो की।।2।।

वे चालीस जवान नही चालीस तिरंगे थे ।
देश प्रेम की भावना मे मन से नंगे थे।।2।।

लाड के उन लाडी को देखो मांग नही है रोली।
खूटियो.पर अभी टंगी है ब्याह की अनुपम चोली।।2।।

माँ के साडी का आँचल कट.फट कर लहराया।
शव सपूत का सज कर तिरंगे मे द्वार पर आया।।2।।

बाप ने पीटी छाती मगर तनिक नही वह पिचकी।
काश आ जाये बबूआ को पापा की यादी हिचकी।

फिर दुध.मुहे.दातो के मुख ने खुब जोर-जोर से ली सिसकी।
फिर कोमल कोमल हाथे वो अग्नी दान को खिसकी।।2।।

अरे जा रे मेरे श्वेत कबूतर तेरी कमी खलेगी।।
देख तेरी माँ भारतीय कब अपना केश.घूलेगी।।4।।

...।। Harshvardhan Upadhyay
Btech first year
Electrical engineering
Department MMMUT
Gorakhpur



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