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Purana Ghar

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20 -Oct-2015 Sunny Kapoor Memories Poems 0 Comments  833 Views
Sunny Kapoor

अपनी जड़ो में आकर सुकून ये दिल पाता हैँ
कुछ पुरानी धुंधली यादो में घिर सा जाता हैँ
वो लकड़ी का तख़्त जो नजरों में आता है
सफ़ेद दीवारों से जो चौक जगमग जाता है
जर्जर अलमारी पर जब हाथ मेरा जाता है
अजीब सा अहसास रगों में दौड़ जाता है
वो छज्जे पर जो साया खड़ा नज़र आता है
पहने कुरता सफ़ेद वो शक्श आवाज लगाता है
फर्श कमरे का नर्म गद्दे सा रूप पाता है
नींद का आलम जेहन में घर कर जाता है
मंद चलता पंखा भी हवा ठंडी दे जाता है
चुने मिटटी का जीना भी महक ले आता है
ख़ामोशी पसरी ऐसी जैसे कोईे सुरीला गीत गाता है
मेरे पुराने घर से कुछ ऐसा मेरा नाता है ।।।



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