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रात के आंगन में देखो

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13 -Jul-2019 Mukesh Kamti Nature Poem 0 Comments  425 Views
रात के आंगन में देखो

रात के आंगन में देखो
कितने तारे टिमटिमाते
मस्त मौला पवन
आसमान को महकाए
आओ आओ मिलकर
कुछ अनोखा गुनगुनाए
रात के आंगन में देखो
कितने तारे टिमटिमाते

चांद की चांदनी से
अंबर के आंगन में
बादलों की काली घटा
आपस में शोर मचाए
आओ आओ मिलकर
कुछ अनोखा गुनगुनाए
रात के आंगन में देखो
कितने तारे टिमटिमाए

सनसनाती गुनगुन
सी आवाज से
सो गई है
जहान आराम से
पैङौ के छम छमाती
सी आवाज से
आओ आओ मिलकर
कुछ अनोखा गुनगुनाए
रातों के आंगन में
देखो कितने तारे टिमटिमाए

रात के आंगन में देखो


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