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रहबर दोस्त।

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25 -Jan-2022 Harpreet Ambalvee Friendship Poems 0 Comments  112 Views
Harpreet Ambalvee

मुझे अपने दोस्तों रहबरो पर बड़ा नाज़ है,
दू कुछ भी तीखा, कड़वा उनको परोस कर,
मगर हर बुर्की के बाद कहते हैं, क्या स्वाद है,

मैं सिर्फ मुंह से बातें करता हूं,
और वो दिल की भी सुन लेते हैं,
लाख छुपाओ दिल के जख्मों को,
मगर वो, दोस्त,यार, भाई, कह के सारे कांटे चुन लेते हैं,

ज़िन्दगी फिर से ज़िन्दगी लगने लगती है,
'तू फिकर ना कर हम हैं', जब बस इतना ही वो कहते हैं,
सच ही है दोस्तों से ही ये जिंदगी आबाद है ,
मुझे अपने दोस्तों रहबरो पर बड़ा नाज़ है,

यह किस्मत है शराब की,
कि जब दोस्त हो तभी उसका रंग चढ़ता है,
खाली अकेले बैठ कर पीने से तो,
शराब का रंग भी अखड़ता है,
दोस्त पास हो तो अंगूर, संतरे का भी अमृत सा स्वाद है,
मुझे अपने दोस्तों रहबरो पर बड़ा नाज़ है,

दोस्ती में ना जाने क्या ऐसी बात है,
दोस्ती जैसा कोई ना रिश्ता ना कोई साथ है,
गिले-शिकवे लड़ाई गालियां सब हैं, इस रिश्ते में,
मगर इन सब में भी झलकता प्यार है,
दोस्ती में ना कोई दुखी न कोई नाराज़ है,
मुझे अपने दोस्तों रहबरो पर बड़ा नाज़ है,

शायद बे-गरज़ प्यार के, फीके सही,
मगर दिल से अल्फाज़ निकलते हैं,
तभी तो बेजान बंजर दिल में,
उसकी बातो से हौसलों के गुल खिलते हैं,
सच्चे दोस्त जिसके होते हैं,
वो कुछ ना होते हुए भी, दुनिया में सबसे अमीर होते है,
सच्चा दोस्त ही दोस्त के दिल की आवाज़ है,
मुझे अपने दोस्तों और हमलों पर बड़ा नाज है,

खुदा का शुक्र है,
कि है कि अम्बालवी की जिंदगी,
ऐसे फूलों से नाबाद है,
मुझे अपने दोस्तों रहबरो पर बड़ा नाज़ है।

रहबर दोस्त।


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