Savan ke Bad/सावन के बाद...........

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16 -Sep-2017 shalu L. Raining Season Poem 0 Comments  45 Views
Savan ke Bad/सावन के बाद...........




हे मेघ! बरस जाओ जरा ।

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22 -Aug-2017 Aakash Parmar Raining Season Poem 0 Comments  127 Views
हे मेघ! बरस जाओ जरा ।

ये नैन तरसे इंतज़ार में तेरे, इन नैनों को और तरसाओ न जरा, आस भी टूट रही विनती करते, इन उम्मीदों को ना झुठलाओ जरा, राह ताक रही है तेरी, अब मिट्टी से मिल जाओ जरा, क्यों सुखा है कंठ जमी का, हे मेघ! बरस जाओ जरा । तड़प रहा आसमा

Baras raha hai rimjhim savan

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04 -Aug-2017 Harjeet Nishad Raining Season Poem 0 Comments  146 Views
Baras raha hai rimjhim savan

Baras raha hai rimjhim savan. Lagta sabko ati man bhavan. Pyas miti sari dharti ki, Badal barase mahake upvan. Varsha jal ko sanchit ker len. Gaddhe khoden ise rok len. Pyase prani pyasi phasalen, Rahengi na ab sabhi soch len. Jal se jeevan hai dharati per. Pashu pakshi sab jal per nirbher . Pani vyarth na bahane paye, Swarg banega is se her gher.

बैरी पिया

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22 -Jul-2017 Anju Goyal Raining Season Poem 0 Comments  152 Views
बैरी पिया

बैरी बदरा  काहे सतावे  घिर घिर कर मेघा लावे पिया मोरे पास नहीं है काहे पिया की याद दिलावे। सजन गए परदेस मोरे अगले बरस फिर वो आवेगे नन्ही बूँदो को बरसाके  काहे मन को खूब जलावे । बिन साजन के सावन बीता झूले पड गए बगिया

वर्षा

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21 -Jul-2017 Suresh Chandra Sarwahara Raining Season Poem 0 Comments  168 Views
वर्षा

वर्षा _______ मेघ उठे हैं नभ में देखो कितने काले काले, इन्हें देखकर दुबक गए हैं जाने कहाँ उजाले। संग हवा के बहते जाते रूप बदलते पल पल, एक जगह ना रहते बैठे ये हैं बालक चंचल। गड़गड़ गड़गड़ गरज उठे अब बड़े जोर से बादल, खटका

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