Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

आसमाँ से बरसता है जब पानी

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06 -Jan-2022 Swami Ganganiya Raining Season Poem 0 Comments  196 Views
आसमाँ से बरसता है जब पानी

आसमाँ से बरसता है जब पानी हमे याद आती है बरसात की वो बीति कहानी हम थे और वो बरसात का पानी नन्हें पैरों से खेलती वो लहरे घर के आँगन का पानी नदियाँ नही हे हमारे गाँव की तलाब से बहकर निकलता सड़कों पर जैसे नहर का पानी हम

बरसात अभी बाक़ी है

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19 -Aug-2021 Swami Ganganiya Raining Season Poem 0 Comments  100 Views
बरसात अभी बाक़ी है

लौट आओ अब तुम बरसात अभी बाकी है बीते दिनों की कुछ बात अभी बाकी तालाब में वो पहली बरसात का पानी अभी बाकी है कागज की कस्तिया तो बह गयी कुछ अरमान अभी बाकी है लौट आओ अब तुम बरसात अभी बाक़ी है तुम भले ना आओ तुम्हारे साथ गु

वर्षा की मनमानी

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03 -Aug-2021 nil Raining Season Poem 0 Comments  407 Views
वर्षा की मनमानी

वर्षा की मनमानी जब वर्षा होती है तो होती है वर्षा ही सब क्रियाएं पड़ जाती ठप्पा जो जहाॅ है बहीं हो जाता है कैद किसान जोत नहीं पाता हल चल नहीं पाता राहगीर अपनी राह हंसीं की उड़ानें रद्द होती बटुक पहुंच नहीं पाते अप

बरसात की बूंदे

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17 -Jun-2021 manojkumar Raining Season Poem 0 Comments  748 Views
बरसात की बूंदे

टप- टप टपक रहे हैं बूंदे बादल से। भीग रहे हैं गोरी के रूप हरे केश। वो झूमती है मस्ती में इठलाती है। टर्र- टर्र मंडूक आवाज़ लगाए, देते कर्ण में संदेश। ओझल आंखो के नजारे, तेजी से जब आंधी आई। बरसात की बूंदे पड़े बदन पर, व

बरसात का मौसम

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03 -Jun-2021 Alok Pandey Raining Season Poem 1 Comments  668 Views
बरसात का मौसम

जब सुरज बादलों में छिप जाता है, फिर पृथ्वी को बरसात नया जीवन देने आता हैं। मिलती है हमे गर्मी की तपिश से राहत, बच्चे हो या बड़े -बूढ़े सब करते बरसात का स्वागत। बरसात की बूंदों से हो जाती धरती हरी-भरी, मैदान और उद्यान क

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