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राजा देश पर बोझ है

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10 -Apr-2021 Harpreet Ambalvee Social Issues Poems 0 Comments  439 Views
राजा देश पर बोझ है

ऐसा राजा देश पर बोझ है
देश का सत्य नाश कर दिया ,
फिर भी निर्लज्ज सा मौन है,
ऐसा राजा देश पर बोझ है ,

बनाया था राजा इसको,
देश की दशा बचाने को,
पर ये सोच बैठा इसको बनाया जनता ने,
विदेशों में सैर सपाटे कराने को,
जहां भी गया ये प्रधान सेवक,
उस देश का बंटाधार हुआ,
या तो वहां का राजा राजा नहीं रहा,
या उस देश का हाल बेहाल हुआ,
ये देश के लिए एक पनौती है,
जिसके लिए कुर्सी बस एक मौज है,
ऐसा राजा देश पर बोझ है,

धर्म जात का सहारा ले कर,
जो लोगो को लड़वाता है,
जवान और किसान के लिए समय नहीं,
लेकिन चुनाव रेलियो में पहुँच जाता है,
झूठ और जुमलो मे सबको ये पछाड़ जाता है,
लेकिन भक्तों को इसे सुनने मे बहुत मज़ा आता है,
युवा, किसान, बूढ़ा,बच्चा हर कोई कर रहा इसका विरोध है,
ऐसा राजा देश पर बोझ है,

कैसे कैसे लोगों के घरों को खाली कर गया,
सरकारी विभागों को घाटे में लाकर खत्म कर गया,
ना रही सरकार न सरकारी नौकरी बच पाई,
पूंजीवाद के हाथो में देश की बागडोर समायी,
बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही रोज है,
ऐसा राजा देश पर बोझ है,

गधे से शिक्षा लेने वाला राजा,
सब बच्चों को यही सिखाता है,
जो बच्चा परीक्षा में पहले कठिन प्रश्न हल करता है,
वो परीक्षा में सफल हो जाता है,
ऐसा राजा अभिशाप है देश पर,
ऐसा राजा देश पर बोझ है,

बिक चुका हर नेता,कानून,
और भक्तों ने बेचा अपना ज़मीर,
देख रहा हूँ बनने वाली एक आँधी की तस्वीर,
ये आँधी किसान, जवान, युवा के रूप इक दिन ऐसी आएगी,
जो इंन बूढ़े ठूंठ के पेड़ों को जड़ से उखाड़ कर दिखाएंगी,
एक दिन सत्य, मानव धर्म का, ध्वज कोई तो फहराएगा,
देश को उन्नती के पथ पर चलते, शिखर पर पहुंचाएगा,
सत्य की हार हमेशा नही होती, असत्य कहा जीतता हर रोज़ है,
अम्बालवी बस सब्र से देख रहा,
अभी का राजा देश पर बोझ है।

राजा देश पर बोझ है


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