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Rang insaano kaa

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26 -Dec-2015 Neeraj Patriotic Poems 0 Comments  843 Views
Rang insaano kaa

क्या रंग है इंसानो का रंग तो है नीले आसमानो का,
खून का रंग तो लाल है अपितु इसमें भी मतभेद है ये देश बांटता लोगो को बस इसी बात का खेद है,
मन की कोई जात नहीं होती दिल की कोई पात नहीं होती यही जोड़ते रिश्तो को, जात के नाम जहाँ जान ले लेते नहीं छोड़ते फरिश्तो को,
कौन हिन्दू कौन मुसलमा कौन है किस जात का नहीं लगता अब हो पायेगा सबेरा इस रात का,
काल के गाल में समां गए ना चीज आज तक समझ आई,माँ की गोद की किलकारी और चिता पे जलती अंगारी इनमे ही छिपी है सचाई,
बहुत हुआ अब इस दंश का दर्द नहीं सहा जाता, इन जहर उगलने वालो को सम्मान नहीं दिया जाता,
भारत माता को बाँट रहे ये रंग की कई लकीरो से,तू न कभी हुई थी न हो पायेगी मुक्त इन घर की जंजीरो से,
आओ बनाये कुछ ऐसा भारत जिसमे जीने की आजादी हो, न कोई मुसलमा न हिन्दू हो ना जात पात का आदि हो.....
.रचियता डॉ नीरज



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