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Rashtriya Pakshi Mor..

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22 -Jan-2016 Santosh Kumar Singh State Birds Of India Poems 0 Comments  1,340 Views
Santosh Kumar Singh

घूमें मोर सदा सज-धज कर.
कढ़ी हुई पोशाक पहन कर.
ज्यादा ही कुछ मन को भाते.
पंख खोल कर नाच दिखाते.
सुन्दर मुकुट एक सिर साजा.
बना पक्षियों का यह राजा.
पंख न सुन्दर हों मादा के.
उसके होते हैं सादा से.
राष्ट्रीय पक्षी यही प्यार का.
भारत, लंका, म्यांमार का.
चन्द्रगुप्त के सिक्कों पर भी.
तख्त ए ताउस' के ऊपर भी.
चित्र मोर का ही पाया है.
समझो उनके मन भाया है.
मोर मारना महापाप है.
ईश्वर देते उन्हें शाप है.
मोर जंगलों में अति पायें.
मानव बस्ती में भी आयें.
मिलते नीले, श्वेत, हरे हैं.
पीकों-पीकों शोर करे हैं.
मिलें मुख्यतः नीले भाई.
हरा मोर होता जावाई.
पंख मोर के झड़ते हैं जब,
हाथ मनुज के पड़ते हैं तब.
उम्र तीस तक ये हैं पाते.
कीट, अनाज, सर्प खा जाते.
मोर घोंसला नहीं बनाते.
गढ्ढ़ों में अंडे मिल जाते.
छब्बीस जनवरी तिरसठ आया.
राष्ट्रीय पक्षी इसे बनाया.

Rashtriya Pakshi Mor..


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