Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

रावण कहता है / RAVAN KAHETA HAI

0
18 -Oct-2018 shalu L. Dussehra Poems 1 Comments  2,922 Views
रावण कहता है / RAVAN KAHETA HAI

रावण कहता है
चौराहे पर खड़ा कर मारते हो मुझे
बुराई की नज़रों से देखते हो मुझे
कसूर क्या था बस अहंकार मेरा, कहता हूँ
राम समझे जो खुद को वो मारे मुझे

तीनो लोक चारों पहर बंधे मेरी खूंटी से
शक्ति थी मांगू जो मिला वो महादेव से
कसूर क्या था बस अहंकार मेरा, कहता हु
मारे मुझे हक़ है उसका जो जुड़ा हो श्री राम से

माया मेरी काया मेरी ब्राम्हणो में नाम मेरा
शक्ति का द्वार मुझमे कुबेर का भंडार मेरा
कसूर क्या था बस अहंकार मेरा, कहता हु
बस गुणों से राम हो जो वो ही करे वध मेरा

है सच्चाई इस बात की मेरी औकात मेरी जात की
देखा न आँख उठाके है मूरत है सीता पवित्रता की
कसूर क्या था बस अहंकार मेरा , कहता हु
किया ना हो कोई पाप जिसने मारे वो ही छवि श्री राम की



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

  • poemocean logo
    Payal (Guest)
    Commented on 24-October-2020

    Very nice poem.

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017