Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

रजिस्ट्री खारिज

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13 -Sep-2016 p.m. Break Up Poems 2 Comments  520 Views
p.m.

इजहार,इकरार और इन्कार
सब तुम्हारा............
मुझसे जुड़ा हर फैसला तुम्हारा
पर मुझे सब खामोशी से मन्जूर ही रहा.....
जो कहो मेरी हाँ,सिर्फ हाँ
आखिर यह हृदय भी तो था तुम्हारा...


तुमने मेरे नाम कर दी थी रजिस्ट्री,
अपने हृदय की रजिस्ट्री
अपने प्रेम की रजिस्ट्री...
अपने पैरों पर पैर रखकर मेरा
घुमाने वाले थे उत्तर-पूरब..


मेरे एक इकरार के लिए,
तुमने कर डाले कितने कॉपी-पेस्ट..
हाँ हाँ इसमें सच में तुम्हारा कोई शानी नहीं..


चन्द दिनों में इतनी सारी कल्पनाएँ उफ्फ्फ....
प्रेम के कितने ही किस्से,
राधा से मीरा तक,
गंगा से यमुना तक........


तुम कान्हा क्यूँ ना बने??
चलो मै खुश हूँ.....
मेरी मासूमियत छल के
सुकून तो आया तुम्हें....
तानों के बाण चलाकर
तुम पर,तुम्हारे मन पर,
गुलाब तो बरसे होंगे ना???


पता है कमी कहाँ थी?
काँटे चुभोने की जल्दबाजी में!



और मैं....
तब से मूक पर विचार मंथन में
मन में भाव और पीड़ा के भण्डार समेटे....
आज फूटना चाहतें है ये भाव
हाँ हाँ तुम इसे बेशर्मी कह लो...


तुम कह रहे थे मुझमें कुछ बदलने को..
और जंग लग गई तुम्हारी सोंच को,
लोहे में नमी की तरह
और बदला क्या??????
टूट-फूट के झड़ गया सब!!!!


सुनो....
ठेस पहुँचाने में भी ,
तुम्हारा कोई शानी नहीं...


तुम्हारी अपंग सोंच.......
हाँ सिर्फ इसी से खारिज हुई,
दिलों की रजिस्ट्री....


तो प्रिये!!!!!!!!!
एक ठोकर तुम्हे भी जरूरी है
आगे बढ़ने के लिए........
नई राह चुनने के लिए.......
इक सही राह चुनने के लिए...



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