Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

केसर आम

0
17 -Nov-2018 Abbas Bohari Relationship Poems 0 Comments  20 Views
केसर आम

अल्लाह के रहमो करम परही है टिकी क़ायनात पत्ता भी नही हिलता बगैर मालिक की इज़ाजत कर्म करना ही है इंसा का धर्म आंधी आये चाहे चले हवा गर्म दिखाई हमारे बागबान ने भरपूर चाहत लगा दी दाव पर अपनी सेहत ओ राहत मालिक करू शुक्र

Sangini

1
26 -Oct-2018 Sunil Sharma Relationship Poems 0 Comments  110 Views
Sangini

संगिनी मेरे तपते जीवन में वर्षा की फुहार हो तुम । मेरी सुबह मेरी शाम हो तुम । जिंदगी की हर मुश्किल का इलाज हो तुम । मेरी प्यारी सी दुनिया का सूत्रधार हो तुम । मेरी जीवन की हर ख़ुशी का राज हो तुम । मेरी हर सफलता की कुं

माँ जब से मैं मायके से आयी हूँ।

0
08 -May-2018 Dr. Swati Gupta Relationship Poems 0 Comments  212 Views
माँ जब से मैं मायके से आयी हूँ।

माँ जब से मैं मायके से आयी हूँ, शरीर तो यहाँ है मेरा पर मन वहीं छोड़ मैं आई हूँ। तेरे ममता की छांव में शीतलता ऐसी मिली है मुझको, चिंता की अग्नि शांत हुई,सारे दुख बिसराई हूँ। तेरे हाथ का खाना खाकर मन तृप्त हुआ मेरा, अमृ

डोर / dor

0
20 -Mar-2018 Akshunya Relationship Poems 0 Comments  181 Views
डोर / dor

यह डोर है प्रेम की या बंधन जीवन का, हूँ मैं तुमसे बंधी, या यह बंधन है मजबूरी का, क्यों यह बंधन केवल मुझे लुभाता है, क्या कोई डोर तुम्हें, मेरी ओर नहीं खींच पाता है? मैं विस्मित सी सोचती रहती हूँ, क्या तेरा मेरा केवल यह

रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं

0
06 -Mar-2018 Madan Saxena Relationship Poems 0 Comments  115 Views
रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं




Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017