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रिश्ता ये प्यार का

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21 -Aug-2020 Mamta Rani Love Poem 0 Comments  65 Views
Mamta Rani

प्रीत प्रेम की डोर से बँधा है रिश्ता ये प्यार का
सच्चे दिल से जो तुमने लिखा प्रेम एहसास का

फासला था मग़र दिलों में हमारे प्रेम बेशुमार था
चाँदनी रात की शीतलता में दिल भी बेकरार था
मैं दूर भी तुमसे थी,पर हरपल तुम पास मेरे थे
मेरे हर शब्द, हर सोच में बस तुम ही साथ मेरे थे

दूर होकर भी सपनो में मजा था मुलाकात का
प्रीत प्रेम की डोर से बँधा है रिश्ता ये प्यार का

हर क्षण हर लम्हा बस तेरी यादों ने घेरा मन को
तेरी छवि ने कातर किया इस मन के उपवन को
दिल की बगियाँ महकी-महकी जैसे फूल गुलाब का
मेरी जवानी पर भी रंग चढ़ा हो रंग तेरे शबाब का

याद आता है हर लम्हा बिताये तेरे साथ का
प्रीत प्रेम की डोर से बँधा है रिश्ता ये प्यार का

सहसा मन ये जगा प्रातः उजाले की अंधयारी थी
मन ये बैरागी सा ताल लिए तेरी छवि भी प्यारी थी
एक चेहरा था उस चेहरे के पीछे जिसे ना मैंने जाना
रुत ये कैसी आयी पहचान के भी ना तुम्हें पहचाना

अब क्या करूँ मेरे दिल में मचलते जज्बात का
प्रीत प्रेम की डोर से बँधा है रिश्ता ये प्यार का

निर्मम था वो चाँद मेरा जिसने भरी उजियारी थी
फैसले ने फासलों से दूर किया शब्द भी अंगारे थे
नयनों से भी अश्रु बहते जैसे जग पूरी बेगानी थी
प्रेम की राहों से भी जानेमन मैं बड़ी अनजानी थी

याद आता हैं हर मंजर तेरी प्यारी बात का
प्रीत प्रेम की डोर से बँधा है रिश्ता ये प्यार का


ममता रानी
राधानगर, बाँका, बिहार



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