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ऋतु चक्र

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12 -Dec-2018 Abbas Bohari Season Poems 0 Comments  370 Views
Abbas Bohari

ले रहा विदा शरद् आ पहुचा हेमंत ऋतु
सजे बाज़ार ले सर्दीकी रंग बिरंगी वस्तु

तिब्बत के गर्म कपड़ों का क्या कहना
मध्यम वर्ग ने उचित दामों पर है पहना

धूम मचाती इंदौर की करारी गज़क
गुड़ और तिल्ली की स्वादिष्ट महक

माँ बनाती थी मीठे नमकीन भजिए
भाईसे निवेदन थोड़ा हमे भी भेजिए

कड़ाके की ठंडमें चाय की चुस्की
बढ़ाये गर्मी दो बूंद डाले जो विस्की

मेरे देस ऋतु आये जाएँ अपनी रफ़्तार
अब्बास बैठा परदेस काममें गिरफ़्तार



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