Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

गंग छंद "गंग धार"

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08 -Aug-2022 Naman River Poems 0 Comments  46 Views
गंग छंद

गंग छंद गंग की धारा। सर्व अघ हारा।। शिव शीश सोहे। जगत जन मोहे।। पावनी गंगा। करे तन चंगा।। नदी वरदानी। सरित-पटरानी।। तट पे बसे हैं। तीरथ सजे हैं।। हरिद्वार काशी। सब पाप नाशी।। ऋषिकेश शोभा। हृदय की लोभा।। भक्त गण

जीवन दायिनी।

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24 -Jun-2022 ताज मोहम्मद River Poems 0 Comments  50 Views
जीवन दायिनी।

जीवन दायिनी, दुःख हरनी गंगा है...!!! जो ह्रदय से कहलाती... सबकी मां है...!!! शिव शंकर, शभूँ की जटा से निकली है...!!! प्रत्येक जीवन में... दुखों की जो हरनी है...!!! आगे आगे, भागीरथी के पदचाप है...!!! पीछे पीछे देखो... मां गंगा का प्रवाह है...!

नदी हूँ मैं

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20 -Jul-2020 Jyoti Ashukrishna River Poems 0 Comments  1,477 Views
नदी हूँ मैं

बहती हुई नदी हूँ मैं कहीं पत्थरों के संग अठखेलियां करती कहीं इठलाती तो, कहीं बलखाती आगे बढ़ जाती कहीं सीढ़ी सी उतरती तो, कहीं किसी ढाल से फिसलकर कुछ रुक सी जाती कहीं किसी घाटी में कलकल करती तो, कहीं प्रपात बन सिंहना

नदी की पीड़ा।

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03 -Oct-2019 Anil Mishra Prahari River Poems 0 Comments  1,594 Views
नदी की पीड़ा।

नदी की पीड़ा। दूषित होकर बहता नदियों का सारा जल। धरती के कण-कण को सींचा ऊसर, समतल या तल नीचा, तृषित जगत् का कण्ठ भिगोकर किरणों से जल लिया दिवाकर, तट शोभित होते शहरों से अमित प्यार जग का लहरों से। अब निर्मल जल को मैला

नदी

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15 -Jun-2017 Suresh Chandra Sarwahara River Poems 0 Comments  3,587 Views
नदी

नदी _____________ छोड़ कर पीछे रेत के ढेर और रूखे सूखे किनारे नदी तो खुद ही न जाने कहाँ बह गई ! दिखते हैं अब मरे हुए घोंघे तटों पर बैठे उकताए हुए बगुले, मछली कछुओं की तो बस याद बाकी रह गई। कितना किया हमने प्रदूषण, जल-वस्त्रों

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