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Rona Aaya

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10 -Jan-2017 shahista mehzabi Miscellaneous Poems 0 Comments  867 Views
Rona Aaya

उसको मेरे बुरे हालात पे रोना आया ,
मुझको भी उसके सवालात पे रोना आया ।

जानती हूँ तू नहीं करता मोहब्बत मुझ से ,
अपने दिल में उठे जज़्बात पे रोना आया।

हर तरफ सब है परेशान ज़माने में क्यू,
हाय इस दौर के हालात पे रोना आया।

छूट जाते हैं कई रिश्ते ग़रीबी से भी,
बात करते हुए हर बात पे रोना आया।

नौकरी जो नहीं मिल पाई उसे सरकारी,
उसको अपनी ही बड़ी ज़ात पे रोना आया।

लुट गई फिर किसी बेटी की सुना है इस्मत
सोच कर ही मुझे इस बात पे रोना आया ।

बाद मरने के ही तारीफ सभी करते हैं
ऐसे 'शाइस्ता' सवालात पे रोना आया ।

By : Shahista Khan

Rona Aaya


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