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सच्चाई पर कविता

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19 -Feb-2020 Omprakash ATRU Youngster Poems 0 Comments  378 Views
सच्चाई पर कविता

आज कलम के कागज से ""
मै दंगा करने वाला हूँ,"".
मीडिया की सच्चाई को मै ""
नंगा करने वाला हूँ "".

मीडिया जिसको लोकतंत्र का""
चौंथा खंभा होना था,""
खबरों की पावनता में "".
जिसको गंगा होना था ""

आज वही दिखता है हमको ""
वैश्या के किरदारों में,"".
बिकने को तैयार खड़ा है ""
गली चौक बाजारों में"".

दाल में काला होता है ""
तुम काली दाल दिखाते हो,"".
सुरा - सुंदरी उपहारों की ""
खूब मलाई खाते हो"".

गले मिले सलमान से शाहरुख़,""
ये खबरों का स्तर है,"".
और दिखाते इंद्राणी का ""
कितने फिट का बिस्तर है "".

म्यॉमार में सेना के ""
साहस का खंडन करते हो,"".
और हमेशा दाउद का""
तुम महिमा मंडन करते हो"".

दलित कोई मर जाए तो ""
घर का मसला कहते हो,"".
आवाज कोई उठाये तो "
देश पे हमला कहते हो"".

लोकतंत्र की संप्रभुता पर ""
तुमने कैसा मारा चाटा है,"".
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दू ""
मुसलमान को बाँटा है"".

दिल्ली में जब पापी वहशी ""
चीरहरण मे लगे रहे,"".
तुम एश्श्वर्या की बेटी के ""
नामकरण मे लगे रहे"".'

दिल से' दुनिया समझ रही है"'"
खेल ये बेहद गंदा है,"".
मीडिया हाउस और नही कुछ""
ब्लैकमेल का धंधा है"".

गूंगे की आवाज बनो ""
अंधे की लाठी हो जाओ,"".
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो ""
और फिर से जिंदा हो जाओ"'"

जय भीम जय संविधान

Short by
ओमप्रकाश मेरोठा हाडोती कवि
मोब: न० = 8875213775

सच्चाई पर कविता


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