Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

अंत की ओर

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20 -Apr-2022 Buddha Prakash Sad Poems 0 Comments  48 Views
अंत की ओर

एक दिन तो अंत आता है , जब पानी सिर से ऊपर हो जाता है , सब कुछ डूब जाता है अज्ञानता में , बिना सूझ-बूझ के जो छलांग लगाता है , गहरे नदी के जल के अन्दर, आवेश में भूल जाता है, नजर-अंदाज कर देता है अपनी कमियों को , तैरने से अनभिज

वक़्त ठहर जा

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22 -Mar-2022 PURNIMA KUMARI Sad Poems 0 Comments  353 Views
वक़्त ठहर जा

बहुत की इंतजार तेरा, तेरा तो कुछ पता ही नहीं क्यों परेशान करता है मुझको क्यों इतना है लगाव तुझको मुझसे बस अब, वक़्त ठहर जा। नदी की उस किनारे में मुझे बस छोड़ दे, वर्षों पहले जहां मैं थी बहती हुई नदी को देख सीखी जो भी

क्या वह सारा वहम था।

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15 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Sad Poems 0 Comments  91 Views
क्या वह सारा वहम था।

क्या वह सारा वहम था,,, जब तू होता हमारे पास था।।1।। कहता है कुछ याद नहीं,,, क्या तू कभी न मेरे साथ था।।2।। यूं तो आज मैं बरबाद हूं,,, मतलब कल भी बरबाद था।।3।। ना अब रही पास दौलत,,, कल खर्चे मे यूं बेहिसाब था।।4।। तरसोगे यूं स

व्यथा

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12 -Mar-2022 Alok Pandey Sad Poems 0 Comments  221 Views
व्यथा

, 2022 रेगिस्तान की तरह मैं तपता, पतझड़ की तरह मैं उजड़ा। मायूसियों से घिरकर मैं थका, किसे सुनाऊ अपने दिल की व्यथा। असंख्य आँसू मेरे आंखों में, अथाह वेदना है मेरे दिल मे। असक्तता मेरे चेहरे के भावों में झलकता, किसे सुना

मेरी इक फ़रियाद है।

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03 -Mar-2022 ताज मोहम्मद Sad Poems 0 Comments  92 Views
मेरी इक फ़रियाद है।

अपनों ने समझ लिया हमको बेकार है। मेरे वजूद पर अबना किसी को ऐतबार है।। क्या करूं कोई देता ना हमको काम है। जानने वालों में मेरा नाम बड़ा बदनाम है।। किसी भी तरह मेरी जिंदगी सुधार दे। मेरे खुदा तुझसे यही मेरी इक फरिय

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