Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वादे से इरादे तक

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28 -Dec-2020 सफ़र Sad Poems 1 Comments  387 Views
वादे से इरादे तक

"जब मिले थे कभी ये इरादा हुआ हाथ में हाथ हो तब ये वादा हुआ उम्र के साथ सब स्वप्न ढलते गए कुछ पता ना चला खुद को छलते गए इस हकीकत में हम सबको खलते गए हैं मिले जख्म जो उनको मलते गए जख्म की कुछ खबर घाव ज्यादा हुआ हाथ में हा

दर्द उठा जब सीने में

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18 -Nov-2020 PURNIMA KUMARI Sad Poems 0 Comments  348 Views
दर्द उठा जब सीने में

दर्द उठा जब सीने में। गाने सुनकर बहला लिया। दिल की बात जुबां में आए। अफसाने बना कर टाल दिया। कशमकश में अटकी सी मैं। अमावस की काली घटा छाई है। हर तरफ एक अजीब सा अंधेरा। हर तरफ एक सन्नाटा सा छाई है। उन गलियों से भी रु

इतना आसान नहीं होता

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16 -Nov-2020 Gian chand sharma Sharma Sad Poems 0 Comments  253 Views
इतना आसान नहीं होता

इतना आसान नहीं होता कब्र की भुर भूरी मिट्टी से उठना और उठकर फिर से दुबक जाना! इतना आसान नहीं होता जिंदा ही गड़े जाने की कोफ्त को खामोशी से सहन कर जाना! इतना आसान नही होता षडयन्त्रों की भारी भरकम शिलाओं को ओढ़ कर निश्

कौन है अपना

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28 -Aug-2020 Dr. Swati Gupta Sad Poems 0 Comments  274 Views
कौन है अपना

कौन है अपना, कौन पराया, यह किसी को समझ न आया। बनकर अपना,जकड़ लिया मोहपाश में, फिर हौले से अपना असर दिखाया। लालच का कीड़ा पनप रहा था ऐसा, यकायक गलत राह पर कदम बढ़ाया। उसकी प्रीत बनी फिर एक छलावा, झूठ की ओट में खोखला उसे बन

आज फिर तुम याद आये

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22 -Aug-2020 ABHEE RAJA FARRUKHABADI Sad Poems 0 Comments  396 Views
आज फिर तुम याद आये

वो दिन वो लम्हे गुजरते गये हम जिंदगी के साथ जीते गये कभी याद करता हूँ वो बीते पल तो लगता है कि वो अलविदा हो गये फुर्सत मिल जाये तो हो आऊं उस गली जहां पर हम रात दिन यूँ ही गुजारते गये हमे पता है कि उस गली का दीदार नहीं

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