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Dar Lagta he

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09 -Dec-2013 Chandan Rathore Sad Poems 0 Comments  1,163 Views
Chandan Rathore

Poem No. 140
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डर लगता है
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हर शाम हर खिलती शुबह से डर लगता है
आज मेरी परछाई से डर लगता है
मै घबरा जाता हूँ अपनी छवि देखकर
आज मुझे मेरी किश्मत से डर लगता है
हर कदम पे हताशा ही भरी मेरे जीवन में
आज जीने से डर लगता है
क्यों मुझे सताते हो खुदा ! मै कसूरवार हूँ
आज तेरे आगे सर झुकाने से डर लगता है
एक दुहाई मै करता हूँ तुझसे कि सब को खुश रखना
आज मेरे लिए कुछ मांगने से डर लगता है
आज मांगना मौत आसान है मेरे लिए
पर मुझे जीने से डर लगता है
मुझे जीने से डर लगता है
आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़ ( ‪#‎ Rathoreorg20‬)
(Facebook,PoemOcean,Google+,Twitter,Udaipur Talents, Jagran Junction , You tube , Sound Cloud )
08:42am, Wed 21-08-2013
_▂▃▅▇█▓▒░ Don't Cry Feel More . . It's Only RATHORE . . . ░▒▓█▇▅▃▂_



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