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PARAJIT MAN

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11 -Feb-2014 Sharma Sad Poems 0 Comments  1,289 Views
Sharma

पराजित मन
******************
बीता जीवन
बिछुड़े साथी
करुण स्मृतियाँ शेष थाती !

मधु मास के
आते -आते
जीवन से
टूट गये सभ नाते
कोयल की कूक
भँवरे का गुंजन
अब मन को कहाँ भाते !

कहीं शहनाई है
कहीं रुसवाई है
कहीं महफ़िल है
कहीं तन्हाई है
और
धूसरित पथ को आज
टुक -टुक देखे
यह पराजित मन !

पंख फैला कभी
नीलगगन में
उड़ जाते थे
तारक को समझ
आनार दाना
चुग आते थे
मधु मास
या कि पतझर
मस्ती में गाते थे
होड़ा -होड़ी में
क्षितिज तक
छू आते थे !

निष्ठुर झंझावतों ने
बुझाई जीवन बाती
बीता जीवन
बिछुड़े साथी
करुण स्मृतियाँ शेष थाती !

___________#______________
ज्ञान



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