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Pyar Mein Tere

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06 -Dec-2014 Raj Sharma Sad Poems 0 Comments  1,046 Views
Raj Sharma

कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने
इसी कशमकश मैं हॅंू
प्यार में तेरे
क्या खोया
और क्या पाया मैंने
ना तू ही मिली
ना प्यार तेरा
ना तेरे घर के सामने
घर बनाया मैंने
कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने

वक्त्त जो कभी था हाथों में
अब फिसल गया
ख्वाव जो तेरा था आॅंखों में
निकल गया
सोचता हूँ वक्त्त की रफ्तार से
क्यों न तुझको चुराया मैंने
कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने

अज़ीब है चाहतों का सफर
जिसे चाहा
वो ही नसीब नहीं होता
न सहन हो दूरियाँ जिस से
अक्सर वो ही करीब नहीं होता
हर बार यही कह के
दिल को समझाया मैंने
कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने

क्यों इतनी मोहब्बत की तुझसे
नफरत अब होती नहीं
इक तेरे सिवा अब मुझको
हसरत कोई होती नहीं
सब दे दिया तुझे
इस दिल में,न किसी के लिए
प्यार बचाया मैंने
कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने

नादान था मैं
जो तुझको अपना मान बैठा
खुद को भी भूल गया
प्यार किया तुझसे ऐसा
शायद तू कभी थी ही नहीं मेरी
क्यों तुझ पर हक जताया मैंने

कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने
कभी खुद को,कभी हालात को
गलत पाया मैंने........



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