Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Rafta Rafta

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08 -Jan-2014 Shouryam Sad Poems 0 Comments  1,371 Views
Shouryam

रफ्ता रफ्ता हम खैरख्वाह हो गए
रकम रकम के शख्सोँ के कायल हो गए

क्योँ रिश्तोँ मेँ हलाहल घोल दिया
कईयोँ के लिए बेपरवाह हो गए

हमने नाराज़ को मनुहार किया
उनके लिलार के शीकन हो गए

नायाब हूँ कुछ की नज़रोँ मेँ
किसी की बद् दुआ के असर हो गए

जन्नत की तलाश मेँ फिरते रहे
इस उपहार के लिए बेकार हो गए

जहाँ मेँ गम के अलावा मिला ही क्या
खुशियोँ के आँगन कहीँ ओर हो गए

देखना चाहती थी जिसे हरपल आँखे मेरी
जाने क्योँ? वो भी ईद का चाँद हो गए



रफ्ता रफ्ता=धीरे धीरे,
खैरख्वाह=भलाई चाहने वाले,
रकम रकम=धीरे धीरे,
कायल=दीवाना,
हलाहल=ज़हर,
मनुहार=मनाना,
लिलार=माथा,
नायाब=बहुमूल्य



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